फ्लाइट कीमतें ट्रैक करना एक समझदार तरीका है, क्योंकि हवाई किराए रोज़ बदलते हैं। एक ही मार्ग पर अलग-अलग दिन और अलग-अलग एयरलाइन के अलग-अलग भाव मिलते हैं। इसलिए जल्दी बुक करना या बहुत देर तक इंतज़ार करना, दोनों ही तरीके जोखिम भरे हो सकते हैं। बेहतर तरीका है कि आप कीमतों को लगातार ट्रैक करें और जब सही भाव दिखे, तब बुकिंग करें। ट्रैकिंग का मतलब हर घंटे स्क्रीन देखना नहीं है। इसका मतलब है कि आप कुछ भरोसेमंद तरीके अपनाएँ और फिर अपने फैसले को आसान बनाएँ।
प्राइस कैलेंडर का इस्तेमाल
प्राइस कैलेंडर एक ऐसा टूल है जो आपको एक महीने या एक पूरे वर्ष के लिए रोज़ाना कीमतों का अंदाज़ा देता है। इसमें आप तारीख बदल-बदल कर देख सकते हैं कि किस दिन भाव कम हैं और किस दिन ज़्यादा। यह खास तौर पर तब उपयोगी है जब आपकी यात्रा की तारीख लचीली हो।
- कैलेंडर देखते समय सिर्फ सबसे कम भाव पर ध्यान न दें; देखें कि कम भाव वाले दिन आपके लिए वास्तव में यात्रा के लिए उपयुक्त हैं या नहीं।
- अगर आपको वापसी भी चाहिए, तो जाने और वापसी दोनों के लिए अलग-अलग कैलेंडर देखें।
- अगर एक ही मार्ग पर कई एयरलाइन उड़ान भरती हैं, तो कैलेंडर में भाव का अंतर बड़ा हो सकता है। इसलिए कम से कम एक सप्ताह तक कैलेंडर पर नज़र रखें।
- कैलेंडर में दिखने वाला भाव हमेशा अंतिम भाव नहीं होता; टैक्स और बैगेज जैसी चीज़ें बाद में जुड़ सकती हैं।
- जब आप एक दिन चुन लें, तो उसी दिन का भाव दोबारा जाँच लें, क्योंकि कैलेंडर का डेटा थोड़ा पुराना हो सकता है।
लचीली तारीखें चुनें
जितनी ज़्यादा लचीली आपकी तारीखें होंगी, उतना ज़्यादा बचत का मौका मिलेगा। अगर आप बस एक तय दिन पर जाना चाहते हैं, तो आपको जो भाव मिले वही लेना पड़ेगा। लेकिन अगर आप एक-दो दिन पहले या बाद में जा सकते हैं, तो आपको बेहतर विकल्प मिल सकते हैं।
- छुट्टियों और सप्ताहांत के आस-पास भाव अक्सर बढ़ते हैं। अगर संभव हो, तो मध्य सप्ताह में उड़ान चुनें।
- बहुत जल्दी सुबह या देर रात की उड़ानों का भाव अक्सर कम होता है, लेकिन इसमें आपको ट्रांसपोर्ट और ठहरने का खर्च भी जोड़ना होगा।
- अगर आपका ट्रिप लंबा है, तो वापसी की तारीख में छोटा बदलाव भी बड़ा फर्क ला सकता है।
- स्कूल छुट्टियों और त्योहारों के दौरान भाव तेज़ी से बढ़ते हैं, इसलिए इन तारीखों से थोड़ा दूर रहने की कोशिश करें।
- तारीख बदलने से पहले हमेशा अपने अवकाश, होटल और ट्रेन की बुकिंग जाँच लें, ताकि बाद में परेशानी न हो।
नज़दीकी एयरपोर्ट देखें
कई बड़े शहरों में एक से ज़्यादा एयरपोर्ट होते हैं। अगर आप सिर्फ एक एयरपोर्ट देखते हैं, तो आप कई बेहतर विकल्प छोड़ सकते हैं। नज़दीकी एयरपोर्ट शामिल करना ट्रैकिंग का एक बड़ा हिस्सा है। लेकिन यह भी ध्यान रखें कि एयरपोर्ट बदलने से ज़मीनी सफर लंबा हो सकता है।
- जाने और वापसी दोनों जगह नज़दीकी एयरपोर्ट जाँचें, न कि सिर्फ एक तरफ।
- एयरपोर्ट तक पहुँचने का खर्च और समय भी अपने बचत में जोड़ें। अगर एयरपोर्ट बहुत दूर है, तो कम भाव वाला टिकट महँगा पड़ सकता है।
- कुछ एयरलाइन सिर्फ छोटे या दूसरे एयरपोर्ट से उड़ान भरती हैं। इसलिए नज़दीकी एयरपोर्ट देखने से आपको अलग एयरलाइन भी मिल सकती हैं।
- अगर आप बड़े बैग के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो ट्रांसपोर्ट का खर्च और ज़्यादा बढ़ सकता है।
- नज़दीकी एयरपोर्ट खास तौर पर तब उपयोगी हैं जब मुख्य एयरपोर्ट पर भाव बहुत ज़्यादा हो या उड़ानें न मिल रही हों।
अलर्ट सेट करें
अलर्ट आपको बार-बार खोजने से बचाते हैं। आप अपना मार्ग और तारीखें डालते हैं और जब भाव बदलता है, तो आपको सूचना मिलती है। यह तरीका उन लोगों के लिए बेहतर है जिन्हें अपनी यात्रा पहले से तय करनी हो।
- अलर्ट बनाते समय अपना अधिकतम बजट भी तय कर लें, ताकि आप बिना सोचे बुकिंग न करें।
- एक ही मार्ग के लिए अलग-अलग तारीखों के अलर्ट बनाना उपयोगी हो सकता है, लेकिन बहुत ज़्यादा अलर्ट बनाने से आप उलझ सकते हैं।
- जब अलर्ट आए, तो भाव का ट्रेंड देखें। अगर भाव लगातार बढ़ रहा है, तो जल्दी बुकिंग करना बेहतर हो सकता है।
- अलर्ट सिर्फ एक एयरलाइन के लिए न बनाएँ; अगर टूल अनुमति दे, तो सभी एयरलाइन शामिल करें।
- अगर आपकी तारीख बहुत नज़दीक है, तो अलर्ट का फायदा कम हो सकता है, क्योंकि भाव तेज़ी से बदलते हैं।
तुलना कैसे करें
भाव देखते समय तुलना सिर्फ भाव की न करें। उड़ान का समय, एयरलाइन, एयरपोर्ट और नियम भी देखें। एक सस्ता टिकट अगर बहुत देर से पहुँचाता है या बहुत जल्दी उड़ता है, तो वह आपके लिए ज़्यादा उपयोगी नहीं होगा। इसलिए तुलना करते समय अपने लिए एक साधारण चेकलिस्ट बनाएँ।
- उड़ान का समय आपके दिनचर्या से मेल खाता है या नहीं।
- एयरलाइन का टिकट बदलने या रद्द करने का नियम क्या है।
- बैगेज शामिल है या नहीं।
- ट्रांसफर या रुकावट है या नहीं।
- एयरपोर्ट तक पहुँचने का खर्च।
बहु-शहर यात्रा में ट्रैकिंग
अगर आप एक से ज़्यादा शहर जा रहे हैं, तो ट्रैकिंग थोड़ी ज़्यादा जटिल हो सकती है। इसमें आपको एक ही टिकट खोजने के बजाय अलग-अलग टिकट भी देखने पड़ सकते हैं। बहु-शहर यात्रा में लचीलापन और भी ज़्यादा ज़रूरी होता है।
- अलग-अलग शहरों के लिए अलग-अलग अलर्ट बनाएँ।
- एक ही टिकट में बहु-शहर विकल्प भी देखें, लेकिन उसकी तुलना अलग टिकटों से ज़रूर करें।
- ट्रांसफर वाले शहरों में लंबा रुकना आपको दूसरा शहर देखने का मौका दे सकता है, लेकिन यह जोखिम भरा भी हो सकता है।
- बहु-शहर यात्रा में नज़दीकी एयरपोर्ट और लचीली तारीखें दोनों ज़्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।
ट्रैकिंग में आम गलतियाँ
कई यात्री ट्रैकिंग करते हैं लेकिन फिर भी महँगा टिकट खरीद लेते हैं, क्योंकि वे कुछ बुनियादी चीज़ें भूल जाते हैं। इन गलतियों से बचना आसान है अगर आप थोड़ा ध्यान रखें।
- सिर्फ सबसे कम भाव देखना और बाकी खर्च न जोड़ना।
- एक ही दिन में बार-बार चेक करना और फिर घबराकर बुकिंग कर लेना।
- नज़दीकी एयरपोर्ट को पूरी तरह न देखना।
- बैगेज, सीट चयन और खाने जैसे अतिरिक्त खर्च न जोड़ना।
- लचीली तारीख होने पर भी सिर्फ एक तारीख पर अटके रहना।
ट्रैकिंग के बाद बुकिंग
जब आप काफी दिनों तक ट्रैक कर चुके हों और भाव आपके बजट के अंदर हो, तो जल्दी निर्णय लें। बहुत लंबा इंतज़ार करने से भाव बढ़ सकता है। लेकिन बिना जाँचे भी बुकिंग न करें।
- बुकिंग से पहले एक बार भाव, तारीख, एयरपोर्ट और बैगेज नियम जाँच लें।
- अगर भाव आपके बजट से थोड़ा ज़्यादा है लेकिन तारीखें आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, तो बुकिंग करना बेहतर हो सकता है।
- अगर भाव बहुत ज़्यादा है और आप लचीले हैं, तो ट्रैकिंग जारी रखें।
- बुकिंग के बाद अपना ईमेल और टिकट एक बार ज़रूर जाँच लें।
एक साधारण दिनचर्या
ट्रैकिंग को आप अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। ज़रूरी नहीं कि हर दिन घंटों लगाएँ। एक साधारण तरीका अपनाएँ और फिर उस पर टिके रहें। शुरू में अपना मार्ग और तारीखें तय करें। फिर प्राइस कैलेंडर देखें और नज़दीकी एयरपोर्ट शामिल करें। एक या दो अलर्ट सेट करें और सप्ताह में एक बार भाव देखें। जब भाव आपके बजट के अंदर हो और तारीखें आपके लिए ठीक हों, तब बुकिंग करें। याद रखें कि ट्रैकिंग का लक्ष्य सबसे कम भाव ढूँढना नहीं है, बल्कि ऐसा भाव ढूँढना है जो आपकी यात्रा और बजट दोनों के लिए सही हो।